मंगलवार, 30 अगस्त 2011

एक नयी कहानी.


जीवन में , हर दिन

बनती है एक नयी कहानी.


कभी मिलती खुशी हमें,

कभी बहता आंखों से पानी,

कभी मिलते लोग पहचाने,

कभी छिपाते पहचान पुरानी ,

कभी कोई देता दिलासा ,

कभी कोई करता बेईमानी,


हर दिन नये तमाशे होते ,

कोई बन जाता राजा, कोई रानी ,

किसी को मिलता मनचाहा वरदान ,

कोई छुपाता गम की निशानी , ,

कोई अपने नसीब को कोसता,

कोई मानता ईश्वर की मेहरबानी,


जीवन में , हर दिन,

बनती है एक नयी कहानी.

11 टिप्‍पणियां:

  1. कभी मिलती खुशी हमें,

    कभी बहता आंखों से पानी,

    कभी मिलते लोग पहचाने,

    कभी छिपाते पहचान पुरानी ,

    कभी कोई देता दिलासा ,

    कभी कोई करता बेईमानी,
    Bahut hee badhiya panktiyan!

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  2. हर दिन एक नई कहानी लेकर आता है। जीवन के उतार चढ़ाव को बहुत ही ख़ूबी के साथ आपने दर्शाया है।
    ईद मुबारक़।

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  3. जैसे ही आसमान पे देखा हिलाले-ईद.
    दुनिया ख़ुशी से झूम उठी है,मनाले ईद.
    ईद मुबारक

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  4. मनोज सर और कुशुमेश सर को भी ईद मुबारक.

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  5. शमीम जी , आपको ईद की तहेदिल से मुबारके / आपकी कविता बेहद सम्वेदनशील है /

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  6. शमीम जी मेरी मान्यता है कि जीवन में हर पल ही एक कहानी न चाहते हुए भी बन जाती है । इसमें न कहानी का दोष है न जीवन का । बहुत ही संजीदगी से पेश की गयी आपकी यह रचना अंतर्मन को आंदोलित कर गयी । धन्यवाद ।

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  7. शमीम जी, एक चीज याद रखिएगा कि हमारा मन किसी से उधार नही लिया गया है या किसी अपरिचित दान में मिली वस्तु नही है। जब संवेदनशीलता के आयाम अपना क्षितिज विस्तृत करने के लिए आकुल हो उठते हैं तो मन में गुंफित भावों का प्रस्फुटन होना बहुत ही स्वभाविक है। आपकी नयी कहानी इन मृदु भावों का प्रतिफलन है।कामना रहेगी कि आप अहर्निश सृजनरत रहें,आप पर मेरा स्नेह सदैव रहेगा।

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