बुधवार, 18 नवंबर 2009

रिमझिम बूँदें







रिमझिम बूँदें ,
याद दिलाती हैं बचपन,
छत से टपकता पानी,
जल भरा आँगन,
गली में भीगते लड़के,
नाले में डूबती-चलती,
कागज की नाव ।

रिमझिम बूँदें,
याद दिलाती हैं डालियाँ,
पेड़ों की हिलती पत्तियाँ,
मां के आँचल में छिपे,
चिड़ियों के छोटे-छोटे बच्चे
,
तालाब में भटकते सर्प,
ईश्वर को पुकारते मेंढक ।

रिमझिम बूँदें,
याद दिलाती हैं बंधन,
अतीत के धागों में उलझा, एक सुखद झण,
काली स्याही-सी अंधेरी रात,
एक लंबा इंतजार,
एक भीगी नम सुबह, जिसके पहले
रात भर भीगता रहा मेरा मन ।

14 टिप्‍पणियां:

  1. ब्ल़ॉग जगत में स्वागत है। ऐसे ही लिखते रहें।

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  2. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com
    Email- sanjay.kumar940@gmail.com

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  3. शानदार , बारिश की बूंदे बहुत कुछ याद दिलाती हैं

    कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
    वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
    डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
    इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
    और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये!!.

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  4. आपकी रचना में मुझे अपना बचपन याद आ गया. ब्लॉग जगत में स्वागत है.

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  5. Aapki is rachnane bachpan kaa gaanv yaad dila diya..apni kavita bhi yaad aa gayi: "Wo ghar bulata hai"!

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  6. सुन्दर कवितायें बार-बार पढने पर मजबूर कर देती हैं. आपकी कवितायें उन्ही सुन्दर कविताओं में हैं.

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